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संदेश

राजस्थान के लोकवाद्य - Folk Instruments of Rajasthan

मानव जीवन संगीत से हमेशा से जुड़ा रहा है। संगीत मानव के विकास के साथ पग-पग पर उपस्थित रहा है। विषण्ण ह्मदय को आह्मलादित एवं निराश मन को प्रतिपल प्रफुल्लित रखने वाले संगीत का अविभाज्य अंग है- विविध-वाद्य यंत्र। इन वाद्यों ने संगीत की प्रभावोत्पादकता को परिवर्धित किया और उसकी संगीतिकता में चार चाँद लगाए हैं। भांति-भाँति के वाद्ययंत्रों के सहयोगी स्वर से संगीत की आर्कषण शक्ति भी विवर्किद्धत हो जाती है। भारतीय संगीत में मारवाड़ में मारवाड़ के विविध पारंपरिक लोक-वाद्य अपना अनूठा स्थान रखते हैं। मधुरता, सरसता एवं विविधता के कारण आज इन वाद्यों ने राष्ट्रीय ही नहीं, अपितु अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान कायम की है। कोई भी संगीत का राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय समारोह या महोत्सव ऐसा नहीं हुआ, जिसमें मरु प्रदेश के इन लोकवाद्यों को प्रतिनिधत्व न मिला है। मारवाडी लोक-वाद्यों को संगीत की दृष्टि से पॉच भागों में विभाजित किया जा सकता है- यथातत, बितत, सुषिर, अनुब व धन। ताथ वाद्यों में दो प्रकार के वाद्य आते हैं- अनुब व धन। अनुब में चमडे से मढे वे वाद्य आते हैं, जो डंडे के आधात से बजते हैं।...

राजस्थान की भौगोलिक स्थिति - Geographic position of Rajasthan

राज्‍य की कुल स्‍थलीय सीमा की लम्‍बाई है Ans:- 5920 किमी #. Rajasthan का पाकिस्तान से लगाती सर्वाधिक लम्बी सीमा वाला जिला कोनसा है ? Ans:- जैसलमेर (471 Kms) #. Rajasthan की सीमा किस राज्य से सर्वाधिक लम्बाई में लगती है ? (RPSC 2010) Ans:- मध्यप्रदेश #. Rajasthan का क्षेत्रफल कितना है ? Ans:- 3,42,239 वर्ग किमी (1,32,139 वर्ग मील) #. Rajasthan की भौगोलिक स्थिति ? Ans:- 23°30 एवं 30°12 उत्तरी अक्षांस 69°30 एवं 78°17 पूर्वी देशान्तर के मध्य   #. Rajasthan की लम्बाई कितनी है ? Ans:- पूर्व से पश्चिम 869 किमी एवं उत्तर से दक्षिण 826 किमी #. Rajasthan का क्षेत्रफल भारत के क्षेत्रफल का कितना प्रतिशत है ? (RPSC 2nd Gr. 2010, 11, B.ed 05) Ans:- 10 .41 % (प्रथम स्थान)   #. Rajasthan की सीमा सबसे कम किस राज्य से लगती है ? Ans:- पंजाब #. Rajasthan का वह जिला जिसकी सीमा सर्वाधिक जिलों से लगती है ? Ans:- पाली (8 जिलो से)   #. कौनसी पर्वत श्रृंखला प्राकृतिक दृष्टि से राज्य को दो भागों में विभाजित करती है। Ans:- अरावली पर्वत श्रृंखला (सिरोही से अलवर की ओर जाती हुई ४८० कि.मी. ल...

राजस्थान की प्रशासनिक इकाईयाँ - Administrative Unit's of Rajasthan

प्रशासनिक इकाईयाँ स्वतत्रंता के पश्चात् 1956 में राजस्थान राज्य के गठन के प्रक्रिया पूर्ण हुई। वर्तमानमें राज्य को प्रशासनिक दृष्टि से सात संभागों , 33 जिलों और 249 तहसीलों में विभक्तकिया गया है। 1. जयपुर संभाग  जयपुर , दौसा , सीकर , अलवर एवं झुन्झुँनूजिले। 2. जोधपुर संभाग जोधपुर , जालौर , पाली , बाड़मेर , सिरोही एवं जैसलमेर जिले। 3. कोटा संभाग कोटा , बूंदी , बारां एवं झालावाड़ जिले। 4.भरतपुर संभाग भरतपुर , धौलपुर , करौली एवंसवाई माधोपुर जिले। 5. उदयपुर संभाग उदयपुर , राजसमंद , डूंगरपुर , बाँसवाड़ा , चित्तौड़गढ़ एवं प्रतापगढ़ जिले 6. अजमेर संभाग अजमेर , भीलवाड़ा , टोंक एवं नागौर जिले। 7. बीकानेरसंभाग बीकानेर , गंगानगर , हनुमानगढ़एवं चूरू जिले।

राजस्थान की जनजातियाँ - Tribes of Rajasthan

राजस्थान की जनजातियाँ Ø राजस्थान में सर्वाधिक जनजातियाँ उदयपुर में निवास करती है., सबसे कम बीकानेर में Ø जिले की कुल जनसंख्या में प्रतिशत के हिसाब से सर्वाधिक जनजातियाँ बाँसवाडा जिले में निवास करती है. तथा न्यूनतम नागौर में. Ø सबसे शिक्षित जनजाति मीणा. मीणा - जयपुर, स.माधोपुर, अलवर, उदयपुर, चित्तौडगढ, डूंगरपुर, कोटा, बूंदी, आदि. भील - बाँसवाडा, डूंगरपुर, उदयपुर, सिरोही, चित्तौडगढ, भीलवाड़ा. गरासिया - डूंगरपुर, चित्तौडगढ, बाँसवाडा, उदयपुर. सांसी - भरतपुर सहरिया - कोटा, बारां डामोर - डूंगरपुर, बाँसवाडा. कंजर - कोटा, बूंदी, झालावाड, भीलवाड़ा, अलवर, उदयपुर, अजमेर. कथौडी - बारां डामोर, कथौडी, कालबेलिया जनजातियाँ    डामोर : - Ø बाँसवाड़ा और डूंगरपुर जिले की सीमलवाडा पंचायत समिति में निवास करती है. Ø मुखी – डामोर जनजाति की पंचायत का मुखिया Ø ये लोग अंधविश्वासी होते है. Ø ये लोग मांस और शराब के काफी शौक़ीन होते है.       कथौडी – Ø यह जनजाति बारां जिले और दक्षिणी-पश्चिम राजस्थान में निवास करते है. Ø मुख्य व्यवसाय – खेर के वृक...

राजस्थान राज्य के बारे में | About Of Rajasthan State

राजस्थान वह रंगीन राज्य है जिसका भारतीय इतिहास में न केवल रोमांस और साहसी पृष्ठभूमि के लिए, बल्कि अपनी सांस्कृतिक और प्राकृतिक समृद्धि के लिए भी अपराजेय स्थान है।  सैकड़ों मील का रेगिस्तान, अद्भुत किले, कलात्मक महल, प्रत्येक की अपनी अनूठी कहानियां और संरचनात्मक उत्कृष्टता के महान उदाहरण हैं। राजस्थानी संस्कृति में लोक नृत्य और गायन संगीत का अद्वितीय स्थान है। राजस्थानी लोक संगीत की मुख्य सामग्री न केवल देवी-देवताओं का स्मरण है, बल्कि रोमांस और प्रेम भी है।  उत्साही लोक नृत्य और संगीत, महान ऐतिहासिक कहानियों और अद्भुत त्योहारों के साथ, रेगिस्तान की भूमि जीवंत हो जाती है।  प्राचीन संग्रह, हथकरघा, हस्तशिल्प, समृद्ध संस्कृति और रंगीन परिधानों के सामने मध्यकालीन संस्कृति अभी भी रोजमर्रा की जिंदगी में बहती है। राजस्थान को प्राचीन आकर्षक और कल्पनाशील मंदिरों और महलों के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। सभी प्रकार के धर्म शांति और एकता के साथ जीवन का आनंद ले रहे हैं। अवलोकन स्थान: उत्तर पश्चिम भारत की राजस्थान के बारे में तथ्य: क्षेत्र: - 342239 वर्ग किमी जिले: - 32 उच...

Rajasthan Culture MCQ

तेजाजी के पुजारी को कहा जािा है- (a) भोपा (b) पंड़ित (c) मिाराज (d) घोिला 2. नागवंशीय गुजजर पररवार में तकस लोकदेविा का जन्म हुआ? (a) पाबू जी (b) देवनारायण जी (c) तेजा जी (d) र्ोर्ा जी 3. कल्लाजी को तकसका अविार माना जािा है? (a) ववष्णु (b) राम (c) कृ ष्ण (d) शेषनार् 4. िल्लीनाथ जी का जन्म तकस जजले में हुआ था? (a) जालोर (b) नार्ौर (c) पाली (d) बािमेर 5. तकस लोक देविा के पुजारी सांखला राजपूि होिे हैं? (a) फत्ताजी (b) वबग्र्ाजी (c) रामदेवजी (d) ििबूजी 6. भूररया बाबा को तकस जाति के लोग इष्ट देव के रूप में पूजिे हैं? (a) मीणा (b) जाट (c) राजपूत (d) र्ुजमर 7. राजस्थान के एकमात्र ऐसे लोक देविा जजनकी मूर्िि न होकर काष्ठ (लकडी) का एकमात्र िोरि होिा है? (a) वीर वबग्र्ाजी (b) र्ोर्ाजी (c) मामा देव (d) तेजाजी 8. राजस्थान के गााँव-गााँव में भूमम के रक्षक देविा के रूप में तकसे पूजा जािा है? (a) भोड़मया जी (b) ििबू जी (c) कल्ला जी (d) रूपनाथ 9. तनम्पनललखखि मेंसेकौन-सा सुमेललि नहीं है?  (a) पाबूजी - कोलू (b) र्ोर्ाजी-र...

श्री पाबूजी राठौड़

पाबूजी राठौड़ का जन्म कोलू मंड जोधपुर में हुआ इनके पिता जी का नाम धन-धन जी वह माता जी का नाम कमला दे था और उनकी पत्नी का नाम फूलन या सुप्रिया दे था सवारी घोड़ी के सर पर कॉल मी था उस जाति से राजपूत गोत्र राठौड़ अवतार लक्ष्मण जी के माने जाते हैं इनके उपनाम ऊंटों के देवता गौ रक्षक प्लेग रोग निवारक लोक देवता पाबूजी के सम्मान में विवाह में 4 फेरे लिए जाते हैं पाबूजी की फड़ मन्नत पूर्ण ऊंट बीमार होने पर नायक जाति भोपे द्वारा रावण हत्था वाद्य यंत्र के साथ पाबूजी की फड़ पढ़ी जाती है पोवाडे महापुरुषों की लोक गाथा पोवाडे पढ़ते समय मार्ट वाद्य यंत्र का प्रयोग करते हैं पाबूजी धणी री याचना या वासना में थोरी जाति के लोगों द्वारा सारंगी वाद्य यंत्र के साथ पाबूजी के गुणों का यशोगान करते हैं पाबूजी का प्रतीक चिन्ह असरोई हाथ में भाला झुकी हुई पार्क या पगड़ी होती है पाबूजी का मेला चित्र माउससे उभरता है नृत्य थाली नृत्य कहलाता है पाबूजी के अंगरक्षक चंदा मामा जी सावन जी हरमल पाबू जी की हत्या का बदला इनके भतीजे रूपनाथ जी दर्डा ने लिया इन्हीं हिमाचल प्रदेश में बालक नाथ जी के रूप में पूजा जाता है प्रमुख मंदिर...