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श्री पाबूजी राठौड़


पाबूजी राठौड़ का जन्म कोलू मंड जोधपुर में हुआ इनके पिता जी का नाम धन-धन जी वह माता जी का नाम कमला दे था
और उनकी पत्नी का नाम फूलन या सुप्रिया दे था
सवारी घोड़ी के सर पर कॉल मी था उस जाति से राजपूत गोत्र राठौड़ अवतार लक्ष्मण जी के माने जाते हैं इनके उपनाम ऊंटों के देवता गौ रक्षक प्लेग रोग निवारक

लोक देवता पाबूजी के सम्मान में विवाह में 4 फेरे लिए जाते हैं पाबूजी की फड़ मन्नत पूर्ण ऊंट बीमार होने पर नायक जाति भोपे द्वारा रावण हत्था वाद्य यंत्र के साथ पाबूजी की फड़ पढ़ी जाती है पोवाडे महापुरुषों की लोक गाथा पोवाडे पढ़ते समय मार्ट वाद्य यंत्र का प्रयोग करते हैं पाबूजी धणी री याचना या वासना में थोरी जाति के लोगों द्वारा सारंगी वाद्य यंत्र के साथ पाबूजी के गुणों का यशोगान करते हैं पाबूजी का प्रतीक चिन्ह असरोई हाथ में भाला झुकी हुई पार्क या पगड़ी होती है पाबूजी का मेला चित्र माउससे उभरता है नृत्य थाली नृत्य कहलाता है पाबूजी के अंगरक्षक चंदा मामा जी सावन जी हरमल पाबू जी की हत्या का बदला इनके भतीजे रूपनाथ जी दर्डा ने लिया इन्हीं हिमाचल प्रदेश में बालक नाथ जी के रूप में पूजा जाता है प्रमुख मंदिर जाखू शिमला हिमाचल प्रदेश में है पाबूजी की हत्या जिंद राव खिची द्वारा की गई थी जायल नागौर में

1206 ईस्वी देचू जोधपुर नामक स्थान पर देवल चारणी की गायों की रक्षा करते हुए बापूजी वीरगति को प्राप्त हो गए थे पाबूजी के जीवन का अधिकांश जानकारी पाबू प्रकाश से मिलती है जिसके रचयिता आशिया मोदी जी हैं


कोलुमंड,
पिताजी धांदल जी 
माता जी कमला देवी 
पत्नी फ्हुलम दे 
घोड़ी केसर कलमी , या लड़ाई की जड़ 
मेला चेत्र अमावश्या 
उपनाम :- लक्ष्मण के अवतार 
हाड फाड़ के देवता

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