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गोगाजी ( लोकदेवता )

 गोगाजी ( लोकदेवता )


एकता व सांप्रदायिक सद़भावना का प्रतीक धार्मिक पर्व गोगामेडी (राजस्थान) में गोगाजी की समाधि स्थल पर मेला लाखों भक्तों के आकर्षण का केंद्र है। 

मंदिर गोगामेडी ,हनुमानगढ

गोगा जी का जन्म ददरेवा चुरु राजस्थान में हुआ था

 इनके पिता जी का नाम जेवर सिंह,  माता जी बाछल दे, पत्नी:- केलंम दे 

 गुरु का नाम गोरखनाथ जी था

 इनकी सवारी नीली घोड़ी गोगा बापा

 जाति राजपूत और गोत्र चौहान था 

मौसेरे भाई अर्जुन सर्जन

 शिर्शमेड़ी ददरेवा, चूरू , धूरमेडी हनुमानगढ़ में है

 इन के 47 पुत्र, 52 भतीजे

 उपनाम 

जाहर पीर जी इसका शाब्दिक अर्थ होता है

 साक्षात देवता,

 जहारवीर,

 नागराज का अवतार

 गायो के रक्षक 

महमूद गजनवी व गोगाजी  का युद्ध का वर्णन कवि महेश जी द्वारा रचित ग्रंथ रावसाल में है, उसी युद्ध में अपने 47 पुत्र को 52 भतीजो  के साथ वीरगति को प्राप्त हुए थे 

मंदिर का निर्माण फिरोजशाह तुगलक ने करवाया

 यह मकबरे नुमा शैली से निर्मित हैं

 प्रवेश द्वार पर बिस्मिल्लाह शब्द अंकित हैं जिसका मतलब होता है शुभ हो ना यह प्रारंभ करना 

गोगाजी का आधुनिक मंदिर का निर्माण बीकानेर के शासक गंगा जी ने करवाया था


पुजारी- मेहर जाति का मुस्लिम होता है जिसे चायल कहा जाता है 

गोगाजी का छोटा मंदिर स्थान खेजड़ी वृक्ष के नीचे होता है

 नागौ के सबसे बड़े देवता तक साथ को पराजित कर अपनी पत्नी को पूर्व पूर्ण जीवित करवाने के कारण राजस्थान मैं सांपों के सबसे बड़े लोग देवता के रूप में प्रसिद्ध हुई

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