विक्रम संवत 1160 मंडावरिया अजमेर नामक स्थल पर मेयर के मीणाओं से युद्ध किया सेंद्रिय अजमेर नामक स्थल पर बास अक्सर अपने तेजाजी को डस लिया था जिसके बाद भाद्रपद शुक्ल दशमी को विक्रम संवत 1160 सुसरा अजमेर नामक स्थल पर तेजाजी वीर गति को प्राप्त हुई है तेजाजी की कर्म स्थली बांसी दुगारी जो नैनवा तहसील के बूंदी जिले में पढ़ती है वीर तेजाजी का पशु मेला परबतसर नागौर पुजारी इनका घोट में कहलाता है 2010-11 में तेजाजी पर एक डाक टिकट जारी हुआ था तेजा जी की आराधना में तैर गीत गाए जाते हैं पुरुषों द्वारा हाथ में छाता लेकर इनकी आराधना में तेजाजी का नृत्य करते हैं वर्ष 2019 तक रिवेन्यू राजस्व की दृष्टि से सबसे बड़ा पशु मेला तेजाजी मेला था वर्तमान में जसवंत मेला भरतपुर है परबतसर में मेल ईमेल को ढूंढिए खेल का योजन होता है
वीर तेजा या तेजाजी एक राजस्थानी लोक देवता हैं। उन्हें शिव के प्रमुख ग्यारह अवतारों में से एक माना जाता है और राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश और हरियाणा आदि राज्यों में देवता के रूप में पूजा जाता है।

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