लोक देवता बाबा रामदेव का जीवन परिचय रामदेवजी का ज़न्म बाडमेर के शिव तहसील के ऊडकासमेर गाँव में भाद्रपद शुक्ल दूज (द्वितीया) को हुआ था । रामदेव जी के पिता का नाम अजमाल जी (तंवर वंशीय) माता का नाम मैणादे था । ये अर्जुन के वंशज माने जाते है रामदेव जी ' रामसा पीर ', ' रूणीचा रा धणी', "बाबा रामदेव ', आदि उपनामों से भी जाने जाते है । रामदेवजी के गुरू का नाम बालीनाथ था । इनके भाई का नाम बीरमदे था । पत्नी का नाम नेतल्दे था (बाबा रामदेव जी का विवाह अमरकोट (वर्तमान पाकिस्तान मे) सोढा, दलैसिंह की सुपुत्री नैतलदे/निहालदे के साथ हुआ ) रामदेव जी के भक्त रामदेव जी के मेघवाल जाति के भक्त रिखिया कहलाते हैं । हिन्दू रामदेव जी को कृष्ण का अवतार मानकर तथा मुसलमान 'रामसा पीर' के रूप में इनको पूजते है । रामदेवजी के प्रिय भक्त यात्री जातरू कहलाते है । प्रतीक चिन्ह रामदेव जी के प्रतीक चिन्ह के रूप में पगल्वे (चरण चिन्ह) बनाकर पूजे जाते है । रामदेव जी के भक्त इन्हें कपडे का बना घोडा चढाते है । इनकी सवारी नीला घोडा था । जिसका रंग सफेद था । इन्हे कुष्ठ रोग निवार...
शिक्षा वह शेरनी का दूध है जिससे जितना पिओगे उतना दहाड़ोगे