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Names of kings of Bundi

बूंदी राजवंश 1.देवाजी (1342-1343) 2.समरसिंह (1343-1346) 3.नरपाल (1346-1370) 4.हम्मीर (1370-1403) 5.वीरसिंह (1403-1413) 6.बैरिशाल (1413-1459) 7.भाणदेव (1458-1503 ) 8.नारायणदास (1503-1527) 9सूरजमल (1527-1531) 10.सुरतान (1531-1554) 11.सुर्जन(1554-1585) 12.भोज (1585-1608) 13.रतनसिंह (1608-1631) 14.छत्रसाल (1631-1658) 15.भावसिंह (1658-1681) 16.अनिरुद्धसिंह (1681-1695) 17.बुद्धसिंह (1695-1729) 18.दलेलसिंह (1729-1748) 19.उम्मेदसिंह (1748-1771) 20.अजीतसिंह (1771-1773) 21.विष्णुसिंह (1773-1821) 22.रामसिंह (1821-1889) 23.रघुवीरसिंह (1889-1927) 24.ईश्वरसिंह (1927-1945) 25.बहादुरसिंह (1945 )

देवनारायणजी ( लोकदेवता )

देवनारायण जी का जन्म मालासेरी डूंगरी, गोठा, आसींद भीलवाड़ा में हुआ  पिताजी का नाम सवाईभोज माता साडू खटाणी जी था  पत्नी पीपल दे (जो जय सिंह जी की पुत्री धार मध्य प्रदेश की थी ) गीत - बगड़ावत  सवारी घोड़ा ले जाकर है  बचपन का नाम उदय सिंह  इनका लालन-पालन देवास मध्य प्रदेश में हुआ  इनको गुर्जर जाति के लोग विष्णु जी का अवतार मानते हैं  गोमूत्र जिसके प्रयोग से आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति प्रारंभ की  विनायक के राजा दुर्जन साल को पराजित कर पिता का बदला लेते हुए गाय  आजाद कार्रवाई मंदिर में खींच लिया और छात्र के भोग लगाया जाता है  बाजरे का खींच, इनके मंदिर में ईंटों की पूजा होती है   प्रथम लोक देवता जिस पर फिल्म बनी है  देवनारायण जी की फड पर 2 सितंबर 1992 को डाक टिकट जारी हुआ  2009 में देवनारायण जी की प्रतिमा पर डाक टिकट की घोषणा  वाचन के समय जंतर वाद्य यंत्र का प्रयोग करते हैं  सर्वाधिक लंबी और सबसे छोटी सर्वाधिक चित्रांकन वाली फड़ देवनारायण जी की है  राणा सांगा वह सर प्रताप सिंह जी के इष्ट देव ज...

मेहोजी मांगलिया ( लोकदेवता )

 मेहोजी मांगलिया ( लोकदेवता ) मैं हाजी मांगलिया बोलता क्यों सर नागौर के थे उनका लालन-पालन ओसियां जोधपुर में हुआ था पूजा स्थल बात ही नहीं जोधपुर में है पिताजी गोपाल राव सांखला इन की सवारी किरण काबरा घोड़ा दिन का मेला भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को लगता है जैसलमेर शासक रंग देव के सामने गौ रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए पुजारी मांगलिया राजपूत होता है जिनके वंश की वर्दी नहीं होती है

हड़बूजी सांखला ( लोकदेवता )

 हड़बूजी सांखला ( लोकदेवता ) हड़बूजी सांखला का जन्म बुंदेल नागौर में हुआ था पिताजी में हा जी सांखला गुरु बालीनाथ जी रामदेव जी के मौसेरे भाई थे सवारी इनकी सियार हैं उनके उपनाम सुकून के शास्त्र के ज्ञाता सन्यासी लोक देवता गोसेवक लोक देवता पूर्व सांसद राव जोधा ने हड़बूजी को बैंक की बैलगाड़ी भेंट की थी रामदेव जी के 10 दिन पश्चात हड़बूजी ने इसी गांव में समाधि ली थी बैंक की जोधपुर में हड़बूजी मंदिर का निर्माण महाराजा अजीतसिंह ने करवाया था इनके मंदिर में बैलगाड़ी की पूजा होती है यह अपन गायों की सेवा करने के कारण प्रसिद्ध हुए थे

MCQ - राजस्थान की भौगोलिक स्थिति - Rajasthan Geography

MCQ - राजस्थान की भौगोलिक स्थिति  Rajasthan Geography प्रश्न-   पश्चिमी बालुकामुक्त मरुस्थलीय क्षेत्र (जैसलमेर-बाड़मेर का चट्टानी भाग) में किस काल की अवसादी चट्टानों का बाहुल्य है ? (1) पाषाण युग (2) टरशीयरी व प्लीस्टोसीन युग (3) मध्य पाषाण काल (4) नव पाषाण काल

राजस्थान की नदियां - Rivers Of Rajasthan

1) चम्बल नदी -  इस नदी का प्राचीन नाम चर्मावती है। कुछ स्थानों पर इसे कामधेनु भी कहा जाता है। यह नदी मध्य प्रदेश के मऊ के दक्षिण में मानपुर के समीप जनापाव पहाड़ी (616 मीटर ऊँची) के विन्ध्यन कगारों के उत्तरी पार्श्व से निकलती है। अपने उदगम् स्थल से 325 किलोमीटर उत्तर दिशा की ओर एक लंबे संकीर्ण मार्ग से तीव्रगति से प्रवाहित होती हुई चौरासीगढ़ के समीप राजस्थान में प्रवेश करती है। यहां से कोटा तक लगभग 113 किलोमीटर की दूरी एक गार्ज से बहकर तय करती है। चंबल नदी पर भैंस रोड़गढ़ के पास प्रख्यात चूलिया प्रपात है। यह नदी राजस्थान के कोटा, बून्दी, सवाई माधोपुर व धौलपुर जिलों में बहती हुई उत्तर-प्रदेश के इटावा जिले मुरादगंज स्थान में यमुना में मिल जाती है। यह राजस्थान की एक मात्र ऐसी नदी है जो सालोंभर बहती है। इस नदी पर गांधी सागर, राणा प्रताप सागर, जवाहर सागर और कोटा बैराज बांध बने हैं। ये बाँध सिंचाई तथा विद्युत ऊर्जा के प्रमुख स्रोत हैं। चम्बल की प्रमुख सहायक नदियों में काली, सिन्ध, पार्वती, बनास, कुराई तथा बामनी है। इस नदी की कुल लंबाई 965 किलोमीटर है। यह राजस्थान में कुल 376 क...

राजस्थान के लोकवाद्य - Folk Instruments of Rajasthan

मानव जीवन संगीत से हमेशा से जुड़ा रहा है। संगीत मानव के विकास के साथ पग-पग पर उपस्थित रहा है। विषण्ण ह्मदय को आह्मलादित एवं निराश मन को प्रतिपल प्रफुल्लित रखने वाले संगीत का अविभाज्य अंग है- विविध-वाद्य यंत्र। इन वाद्यों ने संगीत की प्रभावोत्पादकता को परिवर्धित किया और उसकी संगीतिकता में चार चाँद लगाए हैं। भांति-भाँति के वाद्ययंत्रों के सहयोगी स्वर से संगीत की आर्कषण शक्ति भी विवर्किद्धत हो जाती है। भारतीय संगीत में मारवाड़ में मारवाड़ के विविध पारंपरिक लोक-वाद्य अपना अनूठा स्थान रखते हैं। मधुरता, सरसता एवं विविधता के कारण आज इन वाद्यों ने राष्ट्रीय ही नहीं, अपितु अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान कायम की है। कोई भी संगीत का राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय समारोह या महोत्सव ऐसा नहीं हुआ, जिसमें मरु प्रदेश के इन लोकवाद्यों को प्रतिनिधत्व न मिला है। मारवाडी लोक-वाद्यों को संगीत की दृष्टि से पॉच भागों में विभाजित किया जा सकता है- यथातत, बितत, सुषिर, अनुब व धन। ताथ वाद्यों में दो प्रकार के वाद्य आते हैं- अनुब व धन। अनुब में चमडे से मढे वे वाद्य आते हैं, जो डंडे के आधात से बजते हैं।...

राजस्थान की भौगोलिक स्थिति - Geographic position of Rajasthan

राज्‍य की कुल स्‍थलीय सीमा की लम्‍बाई है Ans:- 5920 किमी #. Rajasthan का पाकिस्तान से लगाती सर्वाधिक लम्बी सीमा वाला जिला कोनसा है ? Ans:- जैसलमेर (471 Kms) #. Rajasthan की सीमा किस राज्य से सर्वाधिक लम्बाई में लगती है ? (RPSC 2010) Ans:- मध्यप्रदेश #. Rajasthan का क्षेत्रफल कितना है ? Ans:- 3,42,239 वर्ग किमी (1,32,139 वर्ग मील) #. Rajasthan की भौगोलिक स्थिति ? Ans:- 23°30 एवं 30°12 उत्तरी अक्षांस 69°30 एवं 78°17 पूर्वी देशान्तर के मध्य   #. Rajasthan की लम्बाई कितनी है ? Ans:- पूर्व से पश्चिम 869 किमी एवं उत्तर से दक्षिण 826 किमी #. Rajasthan का क्षेत्रफल भारत के क्षेत्रफल का कितना प्रतिशत है ? (RPSC 2nd Gr. 2010, 11, B.ed 05) Ans:- 10 .41 % (प्रथम स्थान)   #. Rajasthan की सीमा सबसे कम किस राज्य से लगती है ? Ans:- पंजाब #. Rajasthan का वह जिला जिसकी सीमा सर्वाधिक जिलों से लगती है ? Ans:- पाली (8 जिलो से)   #. कौनसी पर्वत श्रृंखला प्राकृतिक दृष्टि से राज्य को दो भागों में विभाजित करती है। Ans:- अरावली पर्वत श्रृंखला (सिरोही से अलवर की ओर जाती हुई ४८० कि.मी. ल...

राजस्थान की प्रशासनिक इकाईयाँ - Administrative Unit's of Rajasthan

प्रशासनिक इकाईयाँ स्वतत्रंता के पश्चात् 1956 में राजस्थान राज्य के गठन के प्रक्रिया पूर्ण हुई। वर्तमानमें राज्य को प्रशासनिक दृष्टि से सात संभागों , 33 जिलों और 249 तहसीलों में विभक्तकिया गया है। 1. जयपुर संभाग  जयपुर , दौसा , सीकर , अलवर एवं झुन्झुँनूजिले। 2. जोधपुर संभाग जोधपुर , जालौर , पाली , बाड़मेर , सिरोही एवं जैसलमेर जिले। 3. कोटा संभाग कोटा , बूंदी , बारां एवं झालावाड़ जिले। 4.भरतपुर संभाग भरतपुर , धौलपुर , करौली एवंसवाई माधोपुर जिले। 5. उदयपुर संभाग उदयपुर , राजसमंद , डूंगरपुर , बाँसवाड़ा , चित्तौड़गढ़ एवं प्रतापगढ़ जिले 6. अजमेर संभाग अजमेर , भीलवाड़ा , टोंक एवं नागौर जिले। 7. बीकानेरसंभाग बीकानेर , गंगानगर , हनुमानगढ़एवं चूरू जिले।

राजस्थान की जनजातियाँ - Tribes of Rajasthan

राजस्थान की जनजातियाँ Ø राजस्थान में सर्वाधिक जनजातियाँ उदयपुर में निवास करती है., सबसे कम बीकानेर में Ø जिले की कुल जनसंख्या में प्रतिशत के हिसाब से सर्वाधिक जनजातियाँ बाँसवाडा जिले में निवास करती है. तथा न्यूनतम नागौर में. Ø सबसे शिक्षित जनजाति मीणा. मीणा - जयपुर, स.माधोपुर, अलवर, उदयपुर, चित्तौडगढ, डूंगरपुर, कोटा, बूंदी, आदि. भील - बाँसवाडा, डूंगरपुर, उदयपुर, सिरोही, चित्तौडगढ, भीलवाड़ा. गरासिया - डूंगरपुर, चित्तौडगढ, बाँसवाडा, उदयपुर. सांसी - भरतपुर सहरिया - कोटा, बारां डामोर - डूंगरपुर, बाँसवाडा. कंजर - कोटा, बूंदी, झालावाड, भीलवाड़ा, अलवर, उदयपुर, अजमेर. कथौडी - बारां डामोर, कथौडी, कालबेलिया जनजातियाँ    डामोर : - Ø बाँसवाड़ा और डूंगरपुर जिले की सीमलवाडा पंचायत समिति में निवास करती है. Ø मुखी – डामोर जनजाति की पंचायत का मुखिया Ø ये लोग अंधविश्वासी होते है. Ø ये लोग मांस और शराब के काफी शौक़ीन होते है.       कथौडी – Ø यह जनजाति बारां जिले और दक्षिणी-पश्चिम राजस्थान में निवास करते है. Ø मुख्य व्यवसाय – खेर के वृक...

राजस्थान राज्य के बारे में | About Of Rajasthan State

राजस्थान वह रंगीन राज्य है जिसका भारतीय इतिहास में न केवल रोमांस और साहसी पृष्ठभूमि के लिए, बल्कि अपनी सांस्कृतिक और प्राकृतिक समृद्धि के लिए भी अपराजेय स्थान है।  सैकड़ों मील का रेगिस्तान, अद्भुत किले, कलात्मक महल, प्रत्येक की अपनी अनूठी कहानियां और संरचनात्मक उत्कृष्टता के महान उदाहरण हैं। राजस्थानी संस्कृति में लोक नृत्य और गायन संगीत का अद्वितीय स्थान है। राजस्थानी लोक संगीत की मुख्य सामग्री न केवल देवी-देवताओं का स्मरण है, बल्कि रोमांस और प्रेम भी है।  उत्साही लोक नृत्य और संगीत, महान ऐतिहासिक कहानियों और अद्भुत त्योहारों के साथ, रेगिस्तान की भूमि जीवंत हो जाती है।  प्राचीन संग्रह, हथकरघा, हस्तशिल्प, समृद्ध संस्कृति और रंगीन परिधानों के सामने मध्यकालीन संस्कृति अभी भी रोजमर्रा की जिंदगी में बहती है। राजस्थान को प्राचीन आकर्षक और कल्पनाशील मंदिरों और महलों के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। सभी प्रकार के धर्म शांति और एकता के साथ जीवन का आनंद ले रहे हैं। अवलोकन स्थान: उत्तर पश्चिम भारत की राजस्थान के बारे में तथ्य: क्षेत्र: - 342239 वर्ग किमी जिले: - 32 उच...

Rajasthan Culture MCQ

तेजाजी के पुजारी को कहा जािा है- (a) भोपा (b) पंड़ित (c) मिाराज (d) घोिला 2. नागवंशीय गुजजर पररवार में तकस लोकदेविा का जन्म हुआ? (a) पाबू जी (b) देवनारायण जी (c) तेजा जी (d) र्ोर्ा जी 3. कल्लाजी को तकसका अविार माना जािा है? (a) ववष्णु (b) राम (c) कृ ष्ण (d) शेषनार् 4. िल्लीनाथ जी का जन्म तकस जजले में हुआ था? (a) जालोर (b) नार्ौर (c) पाली (d) बािमेर 5. तकस लोक देविा के पुजारी सांखला राजपूि होिे हैं? (a) फत्ताजी (b) वबग्र्ाजी (c) रामदेवजी (d) ििबूजी 6. भूररया बाबा को तकस जाति के लोग इष्ट देव के रूप में पूजिे हैं? (a) मीणा (b) जाट (c) राजपूत (d) र्ुजमर 7. राजस्थान के एकमात्र ऐसे लोक देविा जजनकी मूर्िि न होकर काष्ठ (लकडी) का एकमात्र िोरि होिा है? (a) वीर वबग्र्ाजी (b) र्ोर्ाजी (c) मामा देव (d) तेजाजी 8. राजस्थान के गााँव-गााँव में भूमम के रक्षक देविा के रूप में तकसे पूजा जािा है? (a) भोड़मया जी (b) ििबू जी (c) कल्ला जी (d) रूपनाथ 9. तनम्पनललखखि मेंसेकौन-सा सुमेललि नहीं है?  (a) पाबूजी - कोलू (b) र्ोर्ाजी-र...

श्री पाबूजी राठौड़

पाबूजी राठौड़ का जन्म कोलू मंड जोधपुर में हुआ इनके पिता जी का नाम धन-धन जी वह माता जी का नाम कमला दे था और उनकी पत्नी का नाम फूलन या सुप्रिया दे था सवारी घोड़ी के सर पर कॉल मी था उस जाति से राजपूत गोत्र राठौड़ अवतार लक्ष्मण जी के माने जाते हैं इनके उपनाम ऊंटों के देवता गौ रक्षक प्लेग रोग निवारक लोक देवता पाबूजी के सम्मान में विवाह में 4 फेरे लिए जाते हैं पाबूजी की फड़ मन्नत पूर्ण ऊंट बीमार होने पर नायक जाति भोपे द्वारा रावण हत्था वाद्य यंत्र के साथ पाबूजी की फड़ पढ़ी जाती है पोवाडे महापुरुषों की लोक गाथा पोवाडे पढ़ते समय मार्ट वाद्य यंत्र का प्रयोग करते हैं पाबूजी धणी री याचना या वासना में थोरी जाति के लोगों द्वारा सारंगी वाद्य यंत्र के साथ पाबूजी के गुणों का यशोगान करते हैं पाबूजी का प्रतीक चिन्ह असरोई हाथ में भाला झुकी हुई पार्क या पगड़ी होती है पाबूजी का मेला चित्र माउससे उभरता है नृत्य थाली नृत्य कहलाता है पाबूजी के अंगरक्षक चंदा मामा जी सावन जी हरमल पाबू जी की हत्या का बदला इनके भतीजे रूपनाथ जी दर्डा ने लिया इन्हीं हिमाचल प्रदेश में बालक नाथ जी के रूप में पूजा जाता है प्रमुख मंदिर...

तेजाजी महाराज का परिचय

तेजाजी महाराज का जन्म खरनाल नागौर में हुआ था इनके पिता जी का नाम ताहर जी वह माता का नाम राम कुमारी था गुरु बालम जी गुसाईं नाथ जी के पत्नी का नाम पेमल दे रामचंद्र जी की पुत्री पनेर अजमेर की थी जाति जाट गोत्र धो लिया था सवारी लीलन घोड़ी सिंगारी था उपनाम काला भला का देवता किसानों के देवता कृषि के वैज्ञानिक विक्रम संवत 1160 मंडावरिया अजमेर नामक स्थल पर मेयर के मीणाओं से युद्ध किया सेंद्रिय अजमेर नामक स्थल पर बास अक्सर अपने तेजाजी को डस लिया था जिसके बाद भाद्रपद शुक्ल दशमी को विक्रम संवत 1160 सुसरा अजमेर नामक स्थल पर तेजाजी वीर गति को प्राप्त हुई है तेजाजी की कर्म स्थली बांसी दुगारी जो नैनवा तहसील के बूंदी जिले में पढ़ती है वीर तेजाजी का पशु मेला परबतसर नागौर पुजारी इनका घोट में कहलाता है 2010-11 में तेजाजी पर एक डाक टिकट जारी हुआ था तेजा जी की आराधना में तैर गीत गाए जाते हैं पुरुषों द्वारा हाथ में छाता लेकर इनकी आराधना में तेजाजी का नृत्य करते हैं वर्ष 2019 तक रिवेन्यू राजस्व की दृष्टि से सबसे बड़ा पशु मेला तेजाजी मेला था वर्तमान में जसवंत मेला भरतपुर है परबतसर में ...

राजस्थान की लोकदेवी - जीण माता

  सीकर से 11 कि॰मी॰ दूर ( जयपुर बीकानेर मार्ग पर ) गोरिया से जीण माता मंदिर केलिए मार्ग है।  सीकर जीण माता की अष्टभुजी प्रतिमा है  इस कि जयंती प्रतिवर्ष चैत्र ओर आश्विन के नवरात्रों में मेला भरता है यह चौहानों की कुलदेवी है  जिन घांघू गांव बसाने वाले गंघराय की पुत्री ओर हर्ष की बहिन थी जीण माता की कहानी  मुगल बादशाह औरंगजेब जीनमाता मंदिर को पूरी तरह से नष्ट करना चाहता था।  अपने पुजारियों द्वारा आह्वान किए जाने पर, माता ने भैरों (मक्खी परिवार की एक प्रजाति) की अपनी सेना को बाहर कर दिया, जिसने सम्राट और उसके सैनिकों को अपने घुटनों पर ला दिया।  उसने क्षमा मांगी और दयालु माताजी ने उसे अपने क्रोध से क्षमा कर दिया।  औरंगजेब ने अपने दिल्ली महल से अखंड (एवर-ग्लो) तेल का दीपक दान किया।  यह दीपक आज भी माता के पवित्र गर्भगृह में जल रहा है। जीण माता का वास्तविक नाम  जीण माता का वास्तविक नाम जयंती माता बताया जाता है। माना जाता है कि माता दुर्गा की अवतार है। जीण माता शेखावाटी के यादव, पंडित, राजपूत, अग्रवाल, जांगिड़ आैर मीणा जाति के लाेगाें की क...

गोगाजी ( लोकदेवता )

 गोगाजी ( लोकदेवता ) एकता व सांप्रदायिक सद़भावना का प्रतीक धार्मिक पर्व गोगामेडी (राजस्थान) में गोगाजी की समाधि स्थल पर मेला लाखों भक्तों के आकर्षण का केंद्र है।  मंदिर गोगामेडी ,हनुमानगढ गोगा जी का जन्म ददरेवा चुरु राजस्थान में हुआ था  इनके पिता जी का नाम जेवर सिंह,  माता जी बाछल दे, पत्नी:- केलंम दे   गुरु का नाम गोरखनाथ जी था  इनकी सवारी नीली घोड़ी गोगा बापा  जाति राजपूत और गोत्र चौहान था  मौसेरे भाई अर्जुन सर्जन  शिर्शमेड़ी ददरेवा, चूरू , धूरमेडी हनुमानगढ़ में है  इन के 47 पुत्र, 52 भतीजे   उपनाम  जाहर पीर जी इसका शाब्दिक अर्थ होता है  साक्षात देवता,  जहारवीर,  नागराज का अवतार  गायो के रक्षक  महमूद गजनवी व गोगाजी  का युद्ध का वर्णन कवि महेश जी द्वारा रचित ग्रंथ रावसाल में है, उसी युद्ध में अपने 47 पुत्र को 52 भतीजो  के साथ वीरगति को प्राप्त हुए थे  मंदिर का निर्माण फिरोजशाह तुगलक ने करवाया  यह मकबरे नुमा शैली से निर्मित हैं  प्रवेश द्वार पर बिस्मिल...

राजस्थान की वेशभूषा एवं आभूषण

 राजस्थान की वेशभूषा एवं आभूषण जीनगरी कला-कपड़ों की रंगाई की कला तो राजस्थान में लेटा, मांगरोल एवं सालावास कपड़े की मदों की बुनाई के लिए जाने जाते हैं।राजस्थानी पोशाक जोधपुरी कोट को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली हुई है पुरूषों के वस्त्र 1.धोती :- कमर में पहनने का कपड़ा जो प्रायः चार मीटर लम्बा एवं 90 सेमी. चौड़ा होता है। आदिवासियों द्वारा पहने जाने वाली तंग धोती - ढेपाड़ा/डेपाड़ा कहलाती हैं। 2.अंगरखी / बुगतरी ( बंडी) :- ग्रामीण क्षेत्र में पुरुषों के शरीर के ऊपरी भाग में पहना जाने वाला वस्त्र, यह पूरी बाँहों का बिना कॉलर एवं बटन वाला चुस्त कुर्ता जिसमें बाँधने के लिए कसें (डसें) होती है। यह सफेद रंग का वस्त्र है जिस पर कढ़ाई की जाती है। 3.अचकन :- अंगरखी का उत्तर (संशोधित) रूप।  4.साफा, पगड़ी, फलिया, पाग, पेंचा, बागा (फेंटा) :- सिर पर लपेटे जाने वाला प्राय: सफेद एवं 5.5 मीटर लम्बा व 40 सेमी. चौड़ा होता है। उदयपुर की पगड़ी व जोधपुर का साफा प्रसिद्ध है। उदयशाही, अमरशाही, विजयशाही और शाहजहांनी पगड़ी के प्रकार हैं, तो मेवाड़ महाराणा के पगड़ी बाँधने वाला व्यक्ति छाबदार क...

राजस्थान के पशु मेले ! Rajasthan Ke pashu Mele

  रामदेव पशु मेला  रामदेव पशु मेला मानसर  (नागौर ) मे लगता है यह पशु मेला नागौरी नस्ल के लिए प्रसिद्ध है । यह मेला मार्ग शुक्ल 1 से माघ पूर्णिमा ( फरवरी ) तक लगता है । मल्लीनाथ पशु मेला  यह पशु मेला तिलवाडा (बाड़मेर) में लगता है ।  यह मेला चेत्र कृष्ण 11 से चैत्र शुक्ल 11 ( अप्रैल ) को लगता हैं ।  यह पशु मेला थारपारकर नस्ल के लिए प्रसिद्ध है ।  राज्य का सबसे प्राचीनतम पशु मेला मल्लीनाथ पशु मेला है जो लूणी नदी के किनारे पर लगता है ।  बजरंग पशु मेला  -  यह पशु मेला सिणधरी ( बाडमेर ) में लगता है ।   सेवडिया पशु मेला   यह पशु मेला रानीवाड़ा ( जालौर ) में लगता है ।  यहाँ कांकरेज व मुर्रा नस्ल का क्रय-विक्रय होता है ।  रघुनाथपुरी पशु मेला  -  यह पशु मेला सांचौर ( जालौर ) में लगता है ।  गोमती सागर पशु मेला  यह पशु मेला झालरापाटन ( झालावाड ) मालवी में लगता है ।  यह मेला बैशाख शुक्ल 13 से ज्येष्ठ कृष्ण 5 ( मई ) तक लगता है ।  ब्राह्मणी माता का मेला  यह पशु मेला सोरसण ( बारां ) में लगता है ।...